विशिष्ट आयोजन

वर्तमान सन्दर्भो में समिति, हिन्दी के प्रसार के साथ साथ सभी भारतीय भाषाओ के बीच सम्वाद प्रक्रिया आरम्भ कर भाषायी समन्वयन तथा सूचना तकनीक के क्षेत्र में हिन्दी के प्रयोग को बढावा देने की दिशा में काम कर रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु समिति ने  कई कार्यशालाए आयोजित की है।

आम आदमी और राष्ट्रध्वज

 

 

राष्ट्रध्वज को उपयोग करने का पूरा अधिकार एक आम भारतवासी का है।  इस अधिकार के लिए देश  की सर्वोच्य न्यायालय तक लड़ाई लडने वाले युवा उद्योगपति नवीन जिन्दल का व्याखयान २९ दिसम्बर,९७ को आयोजित किया गया। अपने व्याखयान में श्री जिन्दल ने कहा कि विदेश में नागरिक अपने राष्ट्रध्वज को घरों में बहुत आदर और सम्मान के साथ लगाते है। मुझे भी वहीं से प्रेरणा मिली कि हमारे राष्ट्र में भी नागरिकों को राच्च्ट्रध्वज को सम्मानपूर्ण उपयोग की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होने कहा कि जब मैने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रध्वज का उपयोग शुरू किया, तो शासकीय अधिकारियों ने रोक दिया। इस घटना से मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची और मै यह प्रकरण न्यायालय तक ले गया, तब उच्च न्यायालय ने यह फैसला दिया कि राष्ट्रध्वज लगाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।श्री जिन्दल ने कहा कि राच्च्ट्रध्वज के उपयोग का अर्थ नागरिकों के मानस में राष्ट्र के प्रति सम्मान है।श्री जिन्दल ने ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित करने के लिए केन्द्र को साधुवाद दिया।

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत देश की प्राचीनतम और शीर्षस्थ संस्थाओं में से एक है। सारे देश में राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर देशवासियों में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के उद्वेश्य से समिति की स्थापना 29 जुलाई 1910 को इन्दौर में हुई थी।

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