श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत देश की प्राचीनतम और शीर्षस्थ संस्थाओं में से एक है। सारे देश में राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर देशवासियों में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के उद्वेश्य से समिति की स्थापना 29 जुलाई 1910 को इन्दौर में हुई थी।

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति
११, रवीन्द्रनाथ टैगोर मार्ग
इन्दौर - ४५२००१
(म. प्र.) 

फोन :०७३१ - २५१६६५७

फैक्स :०७३१ – २५२९५११

​ईमेल द्वारा संपर्क में रहें 

विशिष्ट आयोजन

वर्तमान सन्दर्भो में समिति, हिन्दी के प्रसार के साथ साथ सभी भारतीय भाषाओ के बीच सम्वाद प्रक्रिया आरम्भ कर भाषायी समन्वयन तथा सूचना तकनीक के क्षेत्र में हिन्दी के प्रयोग को बढावा देने की दिशा में काम कर रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु समिति ने  कई कार्यशालाए आयोजित की है।

हिन्दी साहित्य सम्मेलन का २४ वाँ अधिवेशन सन्‌ १९३५ में

 

 

समिति के राष्ट्रभाषा प्रचार के संकल्प को ऊर्जा देने के लिए राष्ट्रपिता सन्‌ १९३५ में पुनः इन्दौर आए उन्होंने समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की और पदाधिकारियों को दिशा निर्देशित किया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के २४ वें अधिवेद्गान की अध्यक्षता करते हुए बापू ने पुनः हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प दोहराया।

समिति द्वारा संयोजित यह सम्मेलन राष्ट्रभाषा के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। इसी सम्मेलन में आचार्य काका साहेब कालेलकर ने वर्धालिपि का प्रस्ताव रखा और साहित्य परिषद्‌ के अध्यक्ष श्री रामचन्द्र शुक्ल ने काव्य में अभिव्यंजनावाद विषय के स्वरूप का निर्धारण किया । इस अधिवेद्गान की बचत की राद्गिा से ही वर्धा में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना हुई ।

HOURS

SUNDAY SERVICES

Every Sunday from 6:00pm to 8:00pm


CHILDREN'S SERVICES
Every Wednesday from 
3:00pm to 4:00pm