श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत देश की प्राचीनतम और शीर्षस्थ संस्थाओं में से एक है। सारे देश में राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर देशवासियों में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के उद्वेश्य से समिति की स्थापना 29 जुलाई 1910 को इन्दौर में हुई थी।

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति
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इन्दौर - ४५२००१
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समिति समाचार जून २०१९

समिति समाचार जून २०१९

मतदाता जागरुकता कार्यक्रम

 

वर्तमान में देश में हो रहे लोकसभा चुनाव के संदर्भ में मतदान का महत्त्व व मतदाताओं में जागरुकता हेतु अनेक सामाजिक, स्वैच्छिक साहित्यिक संस्थाओं ने कार्यक्रम आयोजित किए श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति हिन्दी साहित्य समिति ने दिनांक 15 मई 2019 को शिवाजी सभागार में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों व समिति से जुड़े कलाकारों ने सहभागिता की। आरंभ में समिति के प्रधानमंत्री श्री सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, नाट्यकला मर्मज्ञ श्रीराम जोग, चित्रकला गुरु डॉ. शोभा वैद्य आदि ने दीप प्रज्जवलन कर अभियान की शुरूआत की। स्वागत प्रचारमंत्री अरविंद ओझा ने किया। इस अवसर पर लगभग 50 साहित्यकारों की रचनाएँ ‘मतदान करो’ पर प्रदर्शित की गई एवं इसी विषय पर चित्रकारों के चित्र प्रदर्शित किए गए। गुरुकुल की छात्राओं ने सरस्वती वंदपा के साथ सस्वर गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं। समिति के साथ इस कार्यक्रम में आत्मसुखाय बहुजन सुखाय एवं सर्वमासन्य संस्थाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का सरस संचालन ख्यात गायक श्री गौतम काले ने किया। आभार साहित्य मंत्री हरेराम वाजपेयी ने व्यक्त किया। अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

 

 

समिति का कैलेण्डर मालवा-निमाड़ तक छाया

 

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा प्रतिवर्ष एक विशेष जानकारियों के साथ कैलेण्डर निकाला जाता है। वर्ष 2019-20 का कैलेण्डर इन्दौर शहर की 12 विभूतियों को लेकर निकाला गया जो अब स्मृति शेष हैं पर उनकी ख्याति सारी दुनिया में है। साहित्य शिक्षा, कला खेल चिकित्सा उद्योग समाज सेवा से जुड़े इन विभूतियों को कैलेण्डर के साथ समिति ने इस माह इन्दौर से बाहर कई साहित्यिक संस्थाओं में कार्यक्रम आयोजित कर सैकड़ों साहित्यकारों तक पहुँचाया। महू में आर्य समाज मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में श्री प्रकाश आर्य, मुख्य अतिथि एवं श्री शंकर कलाकार की अध्यक्षता में कैलेण्डर का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर समाजवादी द़ृष्टि के सम्पादक श्री रामलाला प्रजापति, सदाशिव कौतुक, रमेश जैन राही, लीलाधर अग्रवाल, बिन्दु एवं कृष्णकांत पंचोली आदि साहित्यकार उपस्थित थे। धार के ऐतिहासिक स्थल भोज शोध संस्थान में कैलेण्डर का लोकार्पण साहित्यकार राधाकिशन बामनिया व डॉ. श्रीकान्त द्विवेदी के साथ सदाशिव कौतुक व हरेराम वाजपेयी ने किया। सभी ने समिति के प्रयास को सराहा। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. दीपेन्द्र शर्मा, राघवेन्द्र शर्मा, संतोष मोहन्ती, मदनलाल विश्वकर्मा एवं नामेश पोल के अलावा धार से म.प्र. लेखक संघ, साहित्य परिषद तथा आयोजक संस्था से निसार अहमद, शरद जोशी, ईश्वर दुबे, अनिल पुजारी, पराग भोसले, चेतन शर्मा, कमल पांचाल, प्रदीप जोशी, अनिता शर्मा, श्वेता मोहित दुर्गेश नागर, राजेन्द्र सिंह चौहान, प्रभाकर खामकर आदि काफी सुख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। खरगोन निमाड़ की तपती धूप में शीतलता का अहसास हुआ जब खरगोन में म.प्र. लेखक संघ के तत्त्वावधान में मेवाड़ मार्बल के सभाकक्ष में आयोजित कैलेण्डर लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अखिलेश बार्चे की अध्यक्षता तथा डॉ. पुष्पा पटेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। साहित्यमंत्री हरेराम वाजपेयी ने ‘वीणा’ पत्रिका व समिति संदर्भ बताया। प्रचारमंत्री अरविंद ओझा ने कैलेण्डर के संदर्भ में विस्तृत जनाकारियाँ दीं। आरंभ में सरस्वती वन्दना राकेश गीते ने प्रस्तुत की। इस कार्यक्रम में ब्रजेश बड़ोले, मोहन परमार, महेश जोशी, जगदीश पाण्ड्या, डॉ. बिल्लौरे, डॉ. पार्वती व्यास, डॉ. जगदीश जोशीला, रमेश शर्मा (गोगाँवा) शरदचन्द्र त्रिवेदी आदि साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप नवीन ने किया व आभार श्री निरंजन स्वरूप गुप्ता ने व्यक्त किया। मालवा निमाड़ क्षेत्र में तीनों स्थानों पर सम्पन्न समिति के कैलेण्डर लोकार्पण समारोह का संचालन प्रदीप नवीन ने तथा आभार साहित्य मंत्री हरेराम वाजपेयी ने व्यक्त किया। समिति के कैलेण्डर की परिकल्पना, संकल्पना एवं अन्य संदर्भ में समिति के प्रचारमंत्री अरविंद ओझा ने विस्तृत जानकारी दी। 

 

डॉ. पद्मा सिंह सम्मानित

 

‘सलिला संस्था’ सलूम्बर, राजस्थान की संयोजक तथा संस्था अध्यक्ष डॉ. विमला भण्डारी द्वारा दसवें राष्ट्रीय बाल साहित्य पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस वर्ष का ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकारलाल शास्त्री स्मृति पुरस्कार’ समिति की शोधमंत्री डॉ. पद्मा सिंह को ‘निबंध विधा’ के अन्तर्गत ‘आत्मज्ञान के जगत् दर्शन’ पर दिया जा रहा है। समिति व वीणा परिवार की ओर से हार्दिक बधाई।

 

पं. श्रीनिवास जोशी सम्मान सुश्री कलापिनी कोमकली को

 

मुझे खुशी है कि पं. श्रीनिवास जोशी सम्मान से मुझे नवाजा गया क्योंकि देवास जन्मस्थली होने के कारण अपने घर मालवा में मिले इस सम्मान का महत्त्व सर्वाधिक है। यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि कुमारजी के संगीत पर पहला हक मालवा का है। उपरोक्त विचार विख्यात गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली ने समिति एवं मालवी जाजम की साझा मिजवानी में आयोजित पं. श्रीनिवास जोशी स्मृति सम्मान समारोह के अवसर पर कहे। उल्लेखनीय है कि पं. जोशी के शताब्दी समारोह के अन्तर्गत मालवी लोकगीतों को समृद्ध करने के लिए कलापिनी जी को सम्मानित किया गया। कलापिनी जी ने कहा कि कुमार जी और श्रीनिवास जोशी की अंतरंगता बेहद घनिष्ठ थी और उनके प्रेम में मालवा और मराठी का मीठा मिलन अभिव्यक्त होता था। कलापिनी जी का सम्मान प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, वंदना जोशी, अरविंद ओझा, अनिल त्रिवेदी और हरेराम वाजपेयी ने किया। समारोह का शुभारंभ सुलक्षणा दुबे की सरस्वती वंदना एवं रजनी मेहता द्वारा फिल्म ‘भाभी की चूडिय़ाँ’(फिल्म के संवाद श्रीनिवास जी ने लिखे थे) के प्रसिद्ध गीत ‘ज्योति कलश छलके...’ से हुआ। इस इस अवसर पर पं. जोशी की स्मृति में आयोजित मालवी कहानी प्रतियोगिता का परिणाम भी घोषित किया गया। प्रथम स्थान सुषमा दुबे, द्वितीय स्थान निर्मला उपाध्याय और तीसरा स्थान पुरुषोत्तम सिसोदिया को प्राप्त हुआ। निर्णायक मंडल में सूर्यकान्त नागर एवं ज्योति जैन शामिल थे। प्रभु जोशी द्वारा दूरदर्शन के लिए निर्मित श्रीनिवास जी के साक्षात्कार का प्रसारण भी किया गया। कबीर भावधारा के वरिष्ठ लेखक डॉ. सुरेश पटेल ने कहा कि इस सम्मान के लिए कलापिनी जी का मनोनयन सर्वथा उचित है। वे कुमार जी की मालवी विरासत को लगातार समृद्ध कर रही हैं। प्रेमचंद सृजनपीठ के निर्देशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार जीवनसिंह ठाकुर ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि मालवी में गद्य की परम्परा को आगे बढ़ाना आवश्यक है। जिस तरह से हमारी बोलियाँ धीरे-धीरे गुम होती जा रही हैं, उसे देखते हुए मालवा अंचल के साहित्यकारों को चाहिए कि वे अपनी बोली में भी रचनाकर्म जारी रखें। श्रीनिवास जोशी जी की सुकन्या हेमा सबनीस ने अपने पिता की स्मृतियों को ताज़ा किया। समारोह में समिति द्वारा प्रकाशित कैलेण्डर का विमोचन किया, जिसे समिति के प्रचार मंत्री अरविंद ओझा द्वारा संकलित किया गया है। कैलेण्डर में श्रीनिवास जी के जन्म शताब्दी अवसर पर मालवी भाषा के कवि के रूप में उल्लेख किया है। मनोज जोशी ने बाँसुरी वादन किया, संचालन संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने किया व आभार प्रकाश जोशी ने माना।

अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

बेमिसाल रहा 'ग़ज़ल का सफर'

समिति में सम्पन्न 'ग़ज़ल का सफर' कार्यक्रम हर तरह से बेमिसाल रहा। गज़लों, गज़लकारों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ बेहतरीन दिल को छूनेवाली गज़लें पेश की गईं। इस बेहतरीन कार्यक्रम का आगाज़ साहित्य मंत्री हरेराम वाजपेयी के स्वागत उद्बोधन के साथ कार्यक्रम की खास बातें बताई फिर संचालन किया। हर दिल मिजाज़ श्री संजय पटेल ने जिन्होंने जनाब ज़ुबेर बहादुर जोश, सुविख्यात शायर (बाँदा घराना), ललित निबंधकार, हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नर्मदाप्रसाद उपाध्याय एवं प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी से गुफ्तगू करते हुए गज़ल के सफर को रुमानी बना दिया साथ ही ·कोकिल कंठी सुश्री कनकश्री भट्ट द्वारा कुछ चुनिंदा गज़लों की सस्वर प्रस्तुति से सभागार तालियों से कई बार गूँज उठा।
 

इस गुफ्तगू में श्री संजय जी द्वारा गज़ल के इतिहास और गज़लकारों तथा इसकी ग्रामर तथा हिन्दी-उर्दू की अब की गज़लों पर प्रश्र पूछे जिनका मंचासीनों ने दस्तावेजी जवाब दिए। आरंभ में श्री जुबेर बहादुर जोश का कहा- ‘न जाने कब से टल रहा है मगर वादा बराबर चल रहा है तुम्हें जो माँगना हो रब से माँगों हर एक मुश्किल में ये ही हल रहा है।’
 

इस अवसर पर गालिब, मीर, मोमिन, दुष्यंत कुमार, चन्द्रसेन विराट, नसीर अंसारी, राहत इन्दौरी, कुमार बाराबंकी, जिगर मुरादाबादी, कैफ भोपाली, ज़ोक, नीरज, अदम गोंडवी आदि को याद करते हुए इनके शे'र पढ़े गए। कनकश्री ने मीर का कलाम - ‘दिल की बातें कही नहीं जाती, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले। समापन पर सईद राही की ग़ज़ल ‘लौटकर कोई नहीं आता शाम तक...’। सुनाई।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत श्री अरविंद जवलेकर, अरविंद ओझा, प्रदीप नवीन, डॉ. जवाहर चौधरी एवं डॉ. पद्मा सिंह ने किया। कार्यक्रम इतना बेहतरीन रहा कि श्रोताओं ने कहा कि दिल अभी नहीं भरा, अत: सफर जारी रखा जाए। वास्तव में यह कार्यक्रम समिति के लिए धरोहर स्वरूप याद रहेगा।


- अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री