विशिष्ट आयोजन
हिन्दी साहित्य सम्मेलन का २४ वाँ अधिवेशन सन्‌ १९३५ में Back

समिति के राष्ट्रभाषा प्रचार के संकल्प को ऊर्जा देने के लिए राष्ट्रपिता सन्‌ १९३५ में पुनः इन्दौर आए उन्होंने समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की और पदाधिकारियों को दिशा निर्देशित किया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के २४ वें अधिवेद्गान की अध्यक्षता करते हुए बापू ने पुनः हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प दोहराया।

समिति द्वारा संयोजित यह सम्मेलन राष्ट्रभाषा के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। इसी सम्मेलन में आचार्य काका साहेब कालेलकर ने वर्धालिपि का प्रस्ताव रखा और साहित्य परिषद्‌ के अध्यक्ष श्री रामचन्द्र शुक्ल ने काव्य में अभिव्यंजनावाद विषय के स्वरूप का निर्धारण किया । इस अधिवेद्गान की बचत की राद्गिा से ही वर्धा में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना हुई ।

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