समिति शताब्दी सम्मानों की घोषणा

श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति की स्थापना सन् 1910 में हुई थी। सन् 2010 में समिति की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर लिए गए निर्णयानुसार प्रतिवर्ष हिंदी साहित्य के दो लेखकों को उनके संपूर्ण साहित्यिक अवदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2018 के ‘समिति शताब्दी सम्मान’ से सम्मानित होने वाले साहित्यकारों के नामों की घोषणा की गई है। यह जानकारी समिति के प्रधानमंत्री प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने दी। वर्ष 2018 का राष्ट्रीय ‘समिति शताब्दी सम्मान’वरिष्ठ कथाकार, लघुकथाकार, संस्मरणकार और संपादक श्री बलराम (दिल्ली) को तथा प्रादेशिक ‘समिति शताब्दी सम्मान' प्रतिष्ठित कथाकार, उपन्यासकार एवं स्त्री-विमर्श अध्येता डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री (इंदौर) को दिया जाएगा। ख्यात ललित निबंधकार और कला व भित्ति चित्र विशेषज्ञ श्री नर्मदाप्रसाद उपाध्याय की अध्यक्षता में प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी (प्रधानमंत्री), श्री देवकृष्ण सांखला, श्री सूर्यकांत नागर (संयोजक पुरस्कार-योजना) अरविंद ओझा, हरेराम वाजपेयी, अरविंद जवलेकर, डॉ. पद्मा सिंह, राकेश शर्मा की उपस्थिति में सम्पन्न समिति की निर्णायक बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। दोनों साहित्यकारों की विविध विधाओं में दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। श्री बलराम सारिका और नवभारत टाइम्स में सहायक संपादक रह चुके हैं। वर्तमान में वह राष्ट्रीय समाचार पत्रिका लोकायत के प्रधान संपादक हैं। डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री हिंदी कहानी और उपन्यास लेखन में एक स्थापित नाम है। इस क्रम में अब तक डॉ. आनन्दप्रकाश दीक्षित, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय, डॉ. प्रभातकुमार भट्टाचार्य, डॉ. विजयबहादुर सिंह, डॉ. कमलकिशोर गोयनका, प्रो. रमेशचन्द्र शाह, प्रो. रमेश दवे, श्रीमती ज्योत्स्ना मिलन, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, डॉ. श्यामसुन्दर दुबे, डॉ. जयकुमार जलज, डॉ. शिवनारायण को ‘समिति शताब्दी सम्मान' से विभूषित किया जा चुका है। अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

क्रयशक्ति में भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था - डा. गोविलकर

भारत की विकास दर 7.4 फीसदी, जो दुनिया में सर्वाधिक - डा. भंडारी

केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किये हैं। ग्लोबल इकानामिक वाच के अनुसार 2014 में भारत की स्थिति 17वें नंबर थी, जो 2019 में ब्रिटेन को पीछे छोड़कर 5वें स्थान पर आ जाएगी। वर्तमान में भारत की क्रय शक्ति दुनिया में तीसरे स्थान पर है। पहले व दूसरे स्थान पर क्रमशः अमेरिका और चीन है और संभावना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की गति चीन से भी तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। भारत की अर्थव्यवस्था में मुख्य भाग कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र हैं। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी इस बात को स्वीकारा है कि भारत की अर्थव्यवस्था चीन से भी विशाल होगी। ये विचार ख्यात अर्थशास्त्री डा. विनायक महादेव गोविलकर (नासिक) के हैं, जो उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था, दशा और दिशा विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता बतौर व्यक्त किये।  डा गोविलकर ने कृषि, किसान और उत्पादन को रेखांकित करते आगे कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई नीतियां और योजनाएं प्रारंभ की हैं। इसमें कृषि उत्पाद का विपणन बढ़ाना और किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलना। इसी के तहत सरकार ने किसान संपदा योजना, मेगा फूड पार्क, एग्रीकल्चर कलस्टर और इलेक्ट्रानिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट की व्यवस्था भी की है, जिससे किसानों के कृषि उत्पाद का आनलाइन शेयर मार्केट की तरह खरीदी-बिक्री हो सके। किसानों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रत्येक गांवों का विद्युतीकरण किया गया है और डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है।  डा गोविलकर ने अपने व्याख्यान को अलग-अलग कालखंड में बांटते हुए अपनी बात को जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत का 1947 से 1975 तक के कालखंड में बैंकों का राष्ट्रीयकरण, भारतीय जीवन बीमा निगम यूनिट ट्रस्ट का राष्ट्रीयकरण और सोने पर नियंत्रण के लिए कई तरह के नियम और कानून बने, जबकि 1977 से 1991 तक का 14 वर्ष का कालखंड सबसे अधिक राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता वाला रहा। इस अवधि में देश में 7 प्रधानमंत्री सत्तारूढ़ हुए, जिसमें से दो की हत्या कर दी गई। यह ऐसा कालखंड था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे अलग-अलग थे और सभी का एकमात्र मकसद सत्ता हासिल करना था। 1991 में भारत की आर्थिक हालत इतनी दयनीय हो गई कि उसके पास विदेशी मुद्रा का भंडार समाप्त हो गया। विदेशों से आयात करने के लिए जब उसके पास विेदेशी मुद्रा नहीं थी तो इस दौर में भारत सरकार को मजबूरन होकर 48 टन सोना गिरवी रखना पड़ा, जिन्होंने सोना गिरवी के बदले हमें विदेशी मुद्रा दी। उनकी शर्त थी कि भारत नई आर्थिक नीति को अपनाये और वह उदारीकरण के रास्ते पर चले। भारत के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं था।  अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ख्यात अर्थशास्त्री डा. जयंतीलाल भंडारी ने कहा कि इस समय भारत की अर्थव्यवस्था संतोषप्रद है। देश की विकास दर 7.4 फीसदी है, जो कि दुनिया में सर्वाधिक है। क्रयशक्ति और जी.डी.पी. के आधार पर भारत 2019 में ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर आगे बढ़ रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी और 2030 तक दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चमकते हुए दिखाई देगी। अतिथि स्वागत अनिल भोजे, अरविंद ओझा, त्रिपुरारीलाल शर्मा, राकेश शर्मा और डॉ. पद्मा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन अरविंद जवलेकर ने किया और अंत में उमेश पारेख ने आभार माना। 

पाक वस्तुओं पर दो सौ फीसदी आयात शुल्क लगने से पाक में महंगाई आठ फीसदी बड़ी - डा. भंडारी 

भारत को चाहिए कि वह चीन को पाक में कोरिडोर बनाने से रोके - प्रो. ज्योति शर्मा

भारत ने पाक को आर्थिक प्रहारों से पस्त करने की रणनीति के तहत पाकिस्तान से आयात होने वाली सभी वस्तुओं पर दो सौ फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया है। इससे पाकिस्तान में महंगाई दर 8 फीसदी बढ़ गई है। आज भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार चार सौ अरब डालर का है, जबकि पाकिस्तान में मात्र 17 अरब डालर। पाकिस्तान की स्थिति आज दिवालिया होने पर है। उसके पास इतनी आर्थिक और सामरिक ताकत भी नहीं है कि वह छह दिन से अधिक युद्ध लड़ सके। भारत को चाहिए कि वह पाकिस्तान पर लगातार आर्थिक हमले जारी रखे। यही समय की मांग है।  ये विचार प्रख्यात अर्थशास्त्री और लेखक डा. जंयतीलाल भंडारी के हैं, जो उन्होंने मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में ‘अब आर्थिक प्रहार से पस्त होगा पाकिस्तान’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर व्यक्त किये। कार्यक्रम का आयोजन समसामयिक अध्ययन केंद्र ने किया था। डा. भंडारी ने अपने वक्तव्य में भारत की आर्थिक, सामरिक और राजनीतिक ताकत को रेखांकित करते हुए बेबाकी के साथ कहा कि पुलवामा हमले के बाद और उसके मुंहतोड़ जवाब के बाद आज सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, बांग्लादेश, फ्रांस, नेपाल ही भारत के साथ नहीं वरन् 57 देशों का मुस्लिम संगठन भी भारत के साथ खड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से 9 गुना बड़ी है और भारत से निर्यात पाकिस्तान की तुलना में करीब दस गुना अधिक है। भारत में आतंकी हमले के बाद पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों का पानी पाकिस्तान में जाने से रोक दिया है। इससे पाकिस्तान और अधिक आर्थिक दृष्टि से पस्त हो गया है।  प्राध्यापक एवं सहवक्ता ज्योति शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान ने यह न समझे कि भारत अहिंसक हैं। वह युद्ध करना जानता है और इसका जवाब उसने 17 फरवरी को दे दिया। भारत सरकार को चाहिए कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर दबाव डाले ताकि वह पाक को आर्थिक कर्ज देने पर रोक लगाए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष 13 बार पाक को कर्ज दे चुका है। यह इस बात का प्रतीक है कि पाक की हालात आर्थिक दृष्टि से कितनी चरमरा चुकी है। पाक में दिन-पर-दिन उसकी मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है। वहां के लोगों का रोजगार नहीं मिल रहा है और उद्योगों की हालत बद-से-बदतर होती जा रही है।  अतिथि स्वागत अरविंद जवलेकर, अनिल भोजे ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा. मीनाक्षी स्वामी ने किया और आभार श्री उमेश पारेख ने माना। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर, हरेराम वाजपेयी, डा. पद्मासिंह, अश्विन खरे, प्रदीप नवीन, राकेश शर्मा सदाशिव कौतुक, प्रभु त्रिवेदी, अनिल दामले सहित बड़ी संख्या में गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे। 

अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

समिति की साधारण सभा की बैठक संपन्न

श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर की साधारण सभा की बैठक 30 मार्च 2019 को संपन्न हुई। इसकी अध्यक्षता करते हुए पंडित सत्यनारायण सत्तन एवं प्रधानमंत्री प्रोफेसर सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी ने बैठक की कार्यवाही आरंभ की।  प्रबंधकारिणी में चार स्थान उपसभापित हेतु आवंटित हैं, जिनमें से दो स्थान एक बाहरी एवं एक स्थानीय उपसभापति के रिक्त थे। इन पर बाहरी उपसभापति के लिए प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित और स्थानीय  उपसभापति के लिए  श्री कृष्णकुमार अष्ठाना को सर्वसम्मति से निर्वाचित किया गया। इसी तरह समिति ट्रस्ट (न्यास) के दो सदस्य के स्थान भी रिक्त थे, जिन पर समिति के अर्थमंत्री श्री अरविंद जवलेकर व समिति की प्रबंधकारिणी के सदस्य डॉ. गोपालदत्त ओझा भी सर्वसम्मति से निर्वाचित हुए। निर्वाचित उपसभापति एवं न्यासी सदस्यों को समिति परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग का ७१वां सम्मेलन सम्पन्न

हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग का 71वाँ सम्मेलन दिनांक 10, 11 एवं 12 मार्च 2019 को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के राजीव गाँधी विश्वविद्यालय रोनो हिल्स में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रदेशों से करीब ढाई सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सम्मेलन का उद्घाटन अरुणाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री बी.डी. मिश्रा, राजीव गाँधी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री साकेत कुशवाह एवं ईटानगर की महापौर, सम्मेलन के सभापति श्री सूर्यप्रसाद दीक्षित, सम्मेलन के प्रधानमंत्री श्री विभूति मिश्र, सहायक मंत्री श्री श्यामकृष्ण पाण्डेय, प्रबंधमंत्री श्री कुंतक मिश्र आदि ने किया। इस अवसर पर श्री मध्यभारत हिन्दी समिति, इन्दौर के प्रचारमंत्री अरविन्द ओझा ने अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के दूसरे सत्र में समिति के साहित्य मंत्री हरेराम वाजपेयी ने ‘गाँधी जी का भाषा दर्शन’विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। तीन दिवसीय इस आयोजन में समिति के प्रकाशन मंत्री राजेश शुक्ल के अलावा श्रीमती अमिता ओझा और श्रीमती सरिता शुक्ला ने भी सहभागिता की। अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

समिति की शोध मंत्री डॉ. पद्मा सिंह ‘अखिल भारतीय अम्बिकाप्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कार' से सम्मानित होंगी

विगत इक्कीस वर्षों से प्रदान किए जाने वाले राष्ट्रीय ख्याति के ‘श्री अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति पुरस्कार' की घोषणा 31 मार्च 2019 को पुरस्कार संयोजक श्री जगदीश किंजल्क ने की। देश-प्रदेश से प्राप्त दो सौ से अधिक पुस्तकों में से समिति की शोध मंत्री डॉ. पद्मा सिंह को उनके निबंध-संग्रह ‘आत्मज्ञान में जगत् दर्शन’के लिए ‘अखिल भारतीय श्री अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कार’प्रदान किया जाएगा। समिति एवं ‘वीणा’परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई। अरविंद ओझा, प्रचार मंत्री

श्री नागर की पुस्तकें लोकार्पित

वरिष्ठ साहित्यकार श्री सूर्यकांत नागर की तीन पुस्तकों - ‘यादों के गलियारों से, ‘चुनी हुई कहानियाँ’और ‘शख़्स-अक़्स’का विमोचन ख्यात लेखिका सुधा अरोड़ा (मुम्बई) द्वारा गत दिनों श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के सभागृह में किया गया। इस अवसर पर सुधा जी ने श्री नागर की बहुविध विधाओं में उनकी सृजनात्मकता का उल्लेख करते हुए उनकी कहानियों और आत्म-कथ्यात्मक संस्मरणों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनका मत था कि संस्मरण लेखन तनी हुई रस्सी पर चलने जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य है। तनिक फिसलन हुई की धाराशायी होते हुए देर नहीं लगती। साक्षात्कार ऐसा आईना है, जिसमें समापालक और समापाल्य दोनों के अक़्स दिख जाते हैं। प्रो. महेश दुबे ने कहा कि नागर जी के लेखन में वैचारिकता सुसंगति और नैरंतर्यता है। उनके द्वारा लिए गए साक्षात्कार मात्र औपचारिक नहीं है। इनमें गहराई है। अध्यक्षता प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने की। प्रो. महेश दुबे, डॉ. शरद पगारे और समाजवादी चिंतक अरविंद त्रिवेदी ने पुस्तकों पर विस्तृत चर्चा की। सूर्यकांत नागर ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया। संचालन डॉ. पद्मा सिंह ने किया और आभार प्रदीप नवीन ने माना।