विराटांजलि...

देश के सुपरिचित कवि, श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के उपसभापति एवं न्यासी श्री चन्द्रसेन विराट का 15 नवम्बर 2018 को आकस्मिक अवसान हो गया। उन्हें समिति के अलावा अनेकों साहित्यकारों एवं संस्थाओं ने श्रद्धांजलि दी। इसी क्रम में साहित्यिक संस्था हिन्दी परिवार ने उनके सम्मान में हिन्दी साहित्य समिति के सहयोग से शिवाजी भवन सभागार में विराटजी की 82वीं जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें स्व. विराट के कृतित्व व व्यक्तित्व पर 36 कवियों की रचनाओं की पुस्तक कर ‘विराटांजलि’ का लोकार्पण किया गया। संकलन में सभी रचनाएँ छन्दबद्ध ली गई, जिसके वे जीवन भर पक्षधर और पुजारी रहे। दिनांक 03-12-2018 को (विराटजी के जन्मदिन पर) लोकार्पण के पूर्व श्रीमती हेमलता विराट (विराटजी की पत्नी) व उनके परिवारजनों ने विराटजी के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर डॉ. शरद पगारे, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. जी.डी. अग्रवाल ने जहाँ विराटजी के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए वहीं श्रीमती विराट ने हिन्दी परिवार व समिति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। विराटांजलि में डॉ. रोहित, श्याम चतुर्वेदी, डॉ. शशि निगम, डॉ. पुष्परानी गर्ग, डॉ. चन्द्रा सायता, मुकेश इन्दौरी, भीमा सिंह पवार, हरेराम वाजपेयी, पद्मा राजेन्द्र, सदाशिव कौतुक, प्रभु त्रिवेदी, डॉ. नीरज दीक्षित (खण्डवा), डॉ. सतीश शुक्ल (मुंबई), सन्तोष मोहन्ती दीप, आशा जाकड़, इन्दु पाराशर, कुसुम सोगानी, डॉ. सुधा चौहान, शोभा तेलंग, डॉ. अंजुल कंसल, शोभारानी तिवारी, ज्योति जैन, अनूप सहर, एल.एन. उग्र, दिनेशचन्द्र तिवारी, हंसा मेहता, वन्दना पुणताम्बेकर, जितेन्द्र राज, ओम उपाध्याय, डॉ.रमेश चन्द्र, अशोक खन्ना (दिल्ली), रश्मि सक्सेना, डॉ. सरोज कुमार, मंजुला भूतड़ा, सुभाष निगम आदि की भावपूर्ण रचनाएँ हैं। लोकार्पण अवसर पर उपस्थित करीब 20 कवियों ने रचना पाठ कर श्रद्धांजलि दी। कृति का आवरण संदीप राशिनकर ने रेखांकन कर बनाया। संचालन हरेराम वाजपेयी ने किया आभार श्री अरविन्द जवलेकर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर श्री अरविन्द ओझा, श्री राजेश शुक्ल, हरमोहन नेमा, डॉ. बूला कार आदि काफी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। यह पहला अवसर रहा जब किसी साहित्यकार के दिवंगत होने के 18 दिनों में भावांजलि स्वरूप पुस्तक प्रकाशित की गई।

समिति और वीणा परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि ! 

- अरविन्द ओझा, प्रचारमंत्री

अटलजी को हिन्दी से अगाध प्रेम था

भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री, कुशल राजनेता और अद्भुत कवि श्री अटलबिहारी वाजपेयी को श्रद्धा के साथ स्मरण करते हुए राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के सहयोग से समिति के शिवाजी भवन सभागार में 25 दिसम्बर 2018 को अटलजी की जयन्ती पर दो कार्यक्रम आयोजित किए गए। सबसे पहले माँ सरस्वती और अटलजी के चित्रों पर मंचासीन अतिथियों ने पुष्पहार समर्पित किए फिर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रभु चौधरी ने संस्था परिचय के साथ अटलबिहारी वाजपेयी के कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए महामना मदनमोहन मालवीयजी का भी पुण्य स्मरण कर स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में संस्था द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दी की वैश्विक स्थिति’ का लोकार्पण किया गया, जिस पर सम्पादिका डॉ. रूपा भावसार के साथ समीक्षात्मक विचार ‘देवपुत्र’ के संपादक डॉ. विकास दवे एवं समिति के साहित्य मंत्री हरेराम वाजपेयी ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि कृति में संकलित 33 आलेख हिन्दी के विभिन्न पहलुओं पर सारगर्भित सामग्री समेटे हुए हैं। श्री वाजपेयी ने अटलजी के अगाध हिन्दी प्रेम, मॉरीशस में सम्पन्न 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में अटलजी को दी गई विनम्र श्रद्धांजलि तथा देश व शहर में हिन्दी के विकृत स्वरूप पर भी विचार व्यक्त किए। मुख्य वक्ता विक्रम वि.वि.के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि हिन्दी मात्र मनोरंजन का साधन नहीं है। आज बालकों से भी हिन्दी छीनी जा रही है। हिन्दी का विस्तार विदेशों तक हो रहा है पर इसका रास्ता कंटकों से भरा है। वरिष्ठ साहित्यकार व मुख्य अतिथि श्री कृष्णकुमार अष्ठाना ने कहा कि संस्था अपने उद्देश्यों के कारण राष्ट्रीय स्तर की बन गई है। हिन्दी का प्रयोग, विस्तार बढ़ा है फिर भी विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में हिन्दी के नए शब्द गढ़े जाना जरूरी है। इसके बिना हिन्दी की शिकायत समाप्त नहीं होगी। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा, उज्जैन ने भी उद्बोधन दिया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संस्था द्वारा सर्वश्री जगन्नाथ विश्व, नागदा, डॉ. बूला कार, इन्दौर, डॉ. विद्यासागर मिश्र, लखनऊ, श्रीमती सुजाता शुक्ल, रायपुर तथा डॉ. मनीषा शर्मा, अमरकंटक को ‘अटलजी काव्य सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मानितों को अभिनंदन पत्र, शॉल-श्रीफल, स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। डॉ. प्रभु चौधरी ने बताया कि भविष्य में भी अटलजी की स्मृति में ये सम्मान दिए जाते रहेंगे। अतिथियों का स्वागत श्री मुकेश तिवारी, देवेन्द्र सिंह सिसोदिया, डॉ. (श्रीमती) देवेन्द्र होरा ने किया। अभिनंदन पत्रों का वाचन अमृता अवस्थी ने व संचालन सुषमा दुबे (प्रवक्ता) ने व अन्त में आभार डॉ. मीनू पाण्डेय (भोपाल) ने व्यक्त किया। माँ सरस्वती वक्ता शोभारानी तिवारी ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सर्वश्री ओम तिवारी, डॉ. जी.डी. अग्रवाल, मोहन रावल, जितेन्द्र चौहान, डॉ. पुष्पारानी गर्ग, उमेश पारीख, प्रदीप नवीन, दिनेश तिवारी, मुकेश इन्दौरी, डॉ. सरोज कुमार, गोपाल भावसार, श्री चावला (नागदा), नेहा रामचन्दानी, डॉ. निशा जोशी, स्वप्निल व्यास, डॉ. तृप्ति त्रिवेदी, डॉ. प्रवीण जोशी आदि काफी संख्या में इन्दौर, उज्जैन, नागदा, भोपाल आदि शहरों से आए साहित्यकारों ने सहभागिता की।

- अरविन्द ओझा, प्रचारमंत्री

समिति के सक्रिय सदस्य, प्रसिद्ध समाजसेवी व रंगकर्मी श्री तपन भट्टाचार्य का 62 वर्ष की अवस्था में आकस्मिक निधन

समिति के सक्रिय सदस्य, प्रसिद्ध समाजसेवी व रंगकर्मी श्री तपन भट्टाचार्य का 62 वर्ष की अवस्था में आकस्मिक निधन हो गया। तपनजी ने बाल अधिकार, आदिवासी उत्थान, शराबबंदी सहित कई अभियानों में हिस्सा लिया। बचपन से ही वे समाज सेवा के प्रति समर्पित रहे। गाँवों में जाकर आदिवासियों के लिए काम किया तो गरीब को उनके अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष भी करते रहे। बच्चों की मदद करने वाली संस्थाओं से वे ताउम्र जुड़े रहे । समिति के अनेक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की जाती रही है।

समिति परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

- अरविन्द ओझा, प्रचार मंत्री